अनुशासन पर्व  अध्याय १२८

महेश्वर उवाच

सम्यग्दण्डे स्थितिर्धर्मो धर्मो वेदक्रतुक्रिय़ाः |  ५१   क
व्यवहारस्थितिर्धर्मः सत्यवाक्यरतिस्तथा ||  ५१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति