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शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
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वैशम्पाय़न उवाच
त्रेताय़ुगादौ च पुनर्विवस्वान्मनवे ददौ |  ४७   क
मनुश्च लोकभूत्यर्थं सुताय़ेक्ष्वाकवे ददौ ||  ४७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति