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शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
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वैशम्पाय़न उवाच
अकर्ता चैव कर्ता च कार्यं कारणमेव च |  ५६   क
यथेच्छति तथा राजन्क्रीडते पुरुषोऽव्ययः ||  ५६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति