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शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
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वैशम्पाय़न उवाच
कृष्ण एव हि लोकानां भावनो मोहनस्तथा |  ८२   क
संहारकारकश्चैव कारणं च विशां पते ||  ८२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति