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शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
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वैशम्पाय़न उवाच
जज्ञे वहुज्ञं परमत्युदारं; यं द्वीपमध्ये सुतमात्मवन्तम् |  ३   क
पराशराद्गन्धवती महर्षिं; तस्मै नमोऽज्ञानतमोनुदाय़ ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति