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शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
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वैशम्पाय़न उवाच
एवं स चिन्तय़ित्वा तु भगवान्मधुसूदनः |  ३५   क
रूपाण्यनेकान्यसृजत्प्रादुर्भावभवाय़ सः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति