शान्ति पर्व  अध्याय ३३७

श्रीभगवानु उवाच

अनादिनिधनं लोके चक्रहस्तं च मां मुने |  ५१   क
अनुध्यानान्मम मुने नैतद्वचनमन्यथा ||  ५१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति