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शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
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वैशम्पाय़न उवाच
साङ्ख्यस्य वक्ता कपिलः परमर्षिः स उच्यते |  ६०   क
हिरण्यगर्भो योगस्य वेत्ता नान्यः पुरातनः ||  ६०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति