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शान्ति पर्व
अध्याय ३३८
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वैशम्पाय़न उवाच
उवाच चैनं भगवांश्चिरस्यागतमात्मजम् |  १४   क
स्वागतं ते महावाहो दिष्ट्या प्राप्तोऽसि मेऽन्तिकम् ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति