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शान्ति पर्व
अध्याय ३३८
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रुद्र उवाच
चिरदृष्टो हि भगवान्वैराजसदने मय़ा |  १७   क
ततोऽहं पर्वतं प्राप्तस्त्विमं त्वत्पादसेवितम् ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति