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शान्ति पर्व
अध्याय ३३९
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व्रह्मो उवाच
तत्र यः परमात्मा हि स नित्यं निर्गुणः स्मृतः |  १४   क
स हि नाराय़णो ज्ञेय़ः सर्वात्मा पुरुषो हि सः |  १४   ख
न लिप्यते फलैश्चापि पद्मपत्रमिवाम्भसा ||  १४   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति