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शान्ति पर्व
अध्याय ३३९
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व्रह्मो उवाच
यद्वै सूते धातुराद्यं निधानं; तद्वै विप्राः प्रवदन्तेऽनिरुद्धम् |  १८   क
यद्वै लोके वैदिकं कर्म साधु; आशीर्युक्तं तद्धि तस्योपभोज्यम् ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति