आदि पर्व  अध्याय ३४

सूत उवाच

दैवेनोपहतो राजन्यो भवेदिह पूरुषः |  ३   क
स दैवमेवाश्रय़ते नान्यत्तत्र पराय़णम् ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति