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शान्ति पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
पुरुषस्य हि दृष्ट्वेमामुत्पत्तिमनिमित्ततः |  ११   क
यदृच्छय़ा विनाशं च शोकहर्षावनर्थकौ ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति