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कर्ण पर्व
अध्याय २१
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सञ्जय़ उवाच
तमसा च महाराज रजसा च विशेषतः |  ३६   क
न किञ्चित्प्रत्यपश्याम शुभं वा यदि वाशुभम् ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति