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शान्ति पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
शालावृका इति ख्यातास्त्रिषु लोकेषु भारत |  १७   क
अष्टाशीतिसहस्राणि ते चापि विवुधैर्हताः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति