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शान्ति पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
तस्मिंस्तत्कलुषं सर्वं समाप्तमिति शव्दितम् |  २४   क
प्राय़श्चित्तं न तस्यास्ति ह्रासो वा पापकर्मणः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति