शान्ति पर्व  अध्याय ४७

वैशम्पाय़न उवाच

पुराणे पुरुषः प्रोक्तो व्रह्मा प्रोक्तो युगादिषु |  २०   क
क्षय़े सङ्कर्षणः प्रोक्तस्तमुपास्यमुपास्महे ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति