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शान्ति पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
काङ्क्षमाणाः श्रिय़ं कृत्स्नां पृथिव्यां च महद्यशः |  ३   क
कृतान्तविधिसंय़ुक्ताः कालेन निधनं गताः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति