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शल्य पर्व
अध्याय ३६
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वैशम्पाय़न उवाच
अमोघा गमनं कृत्वा तेषां भूय़ो व्रजाम्यहम् |  ५३   क
इत्यद्भुतं महच्चक्रे ततो राजन्महानदी ||  ५३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति