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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३४
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व्राह्मण्यु उवाच
नेदमल्पात्मना शक्यं वेदितुं नाकृतात्मना |  १   क
वहु चाल्पं च सङ्क्षिप्तं विप्लुतं च मतं मम ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति