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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३४
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व्राह्मण्यु उवाच
यदिदं व्रह्मणो लिङ्गं क्षेत्रज्ञमिति सञ्ज्ञितम् |  ४   क
ग्रहीतुं येन तच्छक्यं लक्षणं तस्य तत्क्व नु ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति