आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ३४

वैशम्पाय़न उवाच

एवं सा रजनी तेषामाश्रमे पुण्यकर्मणाम् |  १   क
शिवा नक्षत्रसम्पन्ना सा व्यतीय़ाय़ भारत ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति