आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ३४

वैशम्पाय़न उवाच

प्राधीतद्विजघोषैश्च क्वचित्क्वचिदलङ्कृतम् |  ११   क
फलमूलसमुद्वाहैर्महद्भिश्चोपशोभितम् ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति