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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः स राजा प्रददौ तापसार्थमुपाहृतान् |  १२   क
कलशान्काञ्चनान्राजंस्तथैवौदुम्वरानपि ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति