आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ३४

वैशम्पाय़न उवाच

स तैः परिवृतो राजा शुशुभेऽतीव कौरवः |  २०   क
विभ्रद्व्राह्मीं श्रिय़ं दीप्तां देवैरिव वृहस्पतिः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति