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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
ते च सर्वे द्विजश्रेष्ठा विष्टरेषु समन्ततः |  २६   क
द्वैपाय़नाभ्यनुज्ञाता निषेदुर्विपुलौजसः ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति