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वन पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
कर्शनार्थो हि यो धर्मो मित्राणामात्मनस्तथा |  २१   क
व्यसनं नाम तद्राजन्न स धर्मः कुधर्म तत् ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति