वन पर्व  अध्याय ३४

वैशम्पाय़न उवाच

सर्वथा धर्ममूलोऽर्थो धर्मश्चार्थपरिग्रहः |  २९   क
इतरेतरय़ोनी तौ विद्धि मेघोदधी यथा ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति