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वन पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
इन्द्रिय़ाणां च पञ्चानां मनसो हृदय़स्य च |  ३७   क
विषय़े वर्तमानानां या प्रीतिरुपजाय़ते |  ३७   ख
स काम इति मे वुद्धिः कर्मणां फलमुत्तमम् ||  ३७   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति