वन पर्व  अध्याय ३४

वैशम्पाय़न उवाच

अनुवुध्यस्व राजेन्द्र वेत्थ धर्मान्सनातनान् |  ५२   क
क्रूरकर्माभिजातोऽसि यस्मादुद्विजते जनः ||  ५२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति