menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय ३४
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
न हि केवलधर्मात्मा पृथिवीं जातु कश्चन |  ५६   क
पार्थिवो व्यजय़द्राजन्न भूतिं न पुनः श्रिय़म् ||  ५६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति