वन पर्व  अध्याय ३४

वैशम्पाय़न उवाच

एवं वलवतः सर्वमिति वुद्ध्वा महीपते |  ५९   क
जहि शत्रून्महावाहो परां निकृतिमास्थितः ||  ५९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति