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वन पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
वाचय़ित्वा द्विजश्रेष्ठानद्यैव गजसाह्वय़म् |  ८१   क
अस्त्रविद्भिः परिवृतो भ्रातृभिर्दृढधन्विभिः |  ८१   ख
आशीविषसमैर्वीरैर्मरुद्भिरिव वृत्रहा ||  ८१   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति