द्रोण पर्व  अध्याय ८६

सञ्जय़ उवाच

लोकत्रय़ं योधय़ेय़ं सदेवासुरमानुषम् |  ६   क
त्वत्प्रय़ुक्तो नरेन्द्रेह किमुतैतत्सुदुर्वलम् ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति