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विराट पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
योऽसौ वृहद्वारणाभो युवा सुप्रिय़दर्शनः |  १२   क
वृहन्नडेति विख्यातः पार्थस्यासीत्स सारथिः ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति