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विराट पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
यदा तत्पावको दावमदहत्खाण्डवं महत् |  १४   क
अर्जुनस्य तदानेन सङ्गृहीता हय़ोत्तमाः ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति