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विराट पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
यदि वै सारथिः स स्यात्कुरून्सर्वानसंशय़म् |  १७   क
जित्वा गाश्च समादाय़ ध्रुवमागमनं भवेत् ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति