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विराट पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स सैरन्ध्र्या भगिनीं प्रत्यभाषत |  १८   क
गच्छ त्वमनवद्याङ्गि तामानय़ वृहन्नडाम् ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति