उद्योग पर्व  अध्याय ३४

विदुर उवाच

पुष्पं पुष्पं विचिन्वीत मूलच्छेदं न कारय़ेत् |  १८   क
मालाकार इवारामे न यथाङ्गारकारकः ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति