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उद्योग पर्व
अध्याय ३४
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धृतराष्ट्र उवाच
पापाशङ्की पापमेवानुपश्य; न्पृच्छामि त्वां व्याकुलेनात्मनाहम् |  ३   क
कवे तन्मे व्रूहि सर्वं यथाव; न्मनीषितं सर्वमजातशत्रोः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति