उद्योग पर्व  अध्याय ३४

विदुर उवाच

अप्युन्मत्तात्प्रलपतो वालाच्च परिसर्पतः |  ३०   क
सर्वतः सारमादद्यादश्मभ्य इव काञ्चनम् ||  ३०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति