उद्योग पर्व  अध्याय ३४

विदुर उवाच

आत्मनात्मानमन्विच्छेन्मनोवुद्धीन्द्रिय़ैर्यतैः |  ६२   क
आत्मैव ह्यात्मनो वन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ||  ६२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति