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वन पर्व
अध्याय १४९
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वैशम्पाय़न उवाच
न हि धर्ममविज्ञाय़ वृद्धाननुपसेव्य च |  २६   क
धर्मो वै वेदितुं शक्यो वृहस्पतिसमैरपि ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति