भीष्म पर्व  अध्याय ३४

श्रीभगवानु उवाच

अनपेक्षः शुचिर्दक्ष उदासीनो गतव्यथः |  १६   क
सर्वारम्भपरित्यागी यो मद्भक्तः स मे प्रिय़ः ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति