भीष्म पर्व  अध्याय ३४

श्रीभगवानु उवाच

तुल्यनिन्दास्तुतिर्मौनी सन्तुष्टो येन केनचित् |  १९   क
अनिकेतः स्थिरमतिर्भक्तिमान्मे प्रिय़ो नरः ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति