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भीष्म पर्व
अध्याय ३४
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श्रीभगवानु उवाच
संनिय़म्येन्द्रिय़ग्रामं सर्वत्र समवुद्धय़ः |  ४   क
ते प्राप्नुवन्ति मामेव सर्वभूतहिते रताः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति