भीष्म पर्व  अध्याय ३४

श्रीभगवानु उवाच

ये तु सर्वाणि कर्माणि मय़ि संन्यस्य मत्पराः |  ६   क
अनन्येनैव योगेन मां ध्याय़न्त उपासते ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति