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द्रोण पर्व
अध्याय १५२
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सञ्जय़ उवाच
स ताड्यमानो वलिभिर्भीमसेनो महावलः |  २३   क
पञ्चभिः पञ्चभिः सर्वांस्तानविध्यच्छितैः शरैः ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति