कर्ण पर्व  अध्याय ३४

सञ्जय़ उवाच

यस्ते कामोऽभिलषितश्चिरात्प्रभृति हृद्गतः |  २५   क
स वै सम्पत्स्यते कर्ण सत्यमेतद्व्रवीमि ते ||  २५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति